देहरादून
देश की संसद में इन दिनों नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को लेकर चर्चा तेज है। इसी बीच उत्तराखंड की पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने इस अधिनियम को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम बताया है। ऋतु खंडूरी भूषण ने कहा कि यह अधिनियम पहले ही संसद में पारित हो चुका है—19 सितंबर 2023 को लोकसभा और 21 सितंबर 2023 को राज्यसभा से इसे मंजूरी मिली, जिसके बाद 23 सितंबर 2023 को राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ यह कानून बना। अब इसे दोबारा चर्चा में लाया जाना इस बात का संकेत है कि इसे प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में गंभीर मंथन चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता साफ हुआ है, जिससे देशभर में खुशी का माहौल है। उनके अनुसार, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच को दर्शाती है, जो महिलाओं को सिर्फ मूलभूत सुविधाएं देने तक सीमित नहीं बल्कि उन्हें नीति-निर्माण के केंद्र में लाने की दिशा में काम कर रही है। ऋतु खंडूरी ने आगे कहा कि वर्ष 2014 के बाद से महिलाओं के लिए गैस कनेक्शन, शौचालय और बैंक खाते जैसी सुविधाओं ने उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। अब समय है कि महिलाएं निर्णय लेने वाले पदों पर भी पहुंचे, ताकि समाज को अधिक समावेशी और सशक्त बनाया जा सके।
उत्तराखंड के संदर्भ में उन्होंने बताया कि राज्य में पंचायत चुनावों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव साफ नजर आता है। आज बड़ी संख्या में महिलाएं मेयर, जिला पंचायत अध्यक्ष, बीडीसी सदस्य और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान देश की राजनीति में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगा। इससे महिलाएं न केवल अपने लिए बल्कि समाज के व्यापक हित में निर्णय लेने में सक्षम होंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि संसद में चल रहे इस मंथन के बाद यह अधिनियम पूरी तरह जमीन पर उतरेगा और वर्ष 2029 तक इसके प्रभावी क्रियान्वयन की उम्मीद है।