देवभूमि से खेलभूमि की ओर बढ़ता उत्तराखंड: मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी से उभरी नई खेल क्रांति।

देहरादून

 

देवभूमि से खेलभूमि की ओर बढ़ता उत्तराखंड: मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी से उभरी नई खेल क्रांति।

उत्तराखंड में खेल प्रतिभाओं को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी राज्य के युवाओं के लिए एक सशक्त मंच बनकर उभरी है। इस पहल ने ग्राम पंचायत स्तर से लेकर राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं तक खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान किया है। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—सामान्य परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रहना पड़े और वे खेल के क्षेत्र में बेहतर भविष्य बना सकें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चैंपियंस ट्रॉफी के माध्यम से राज्य के ढाई लाख से अधिक खिलाड़ियों ने भागीदारी की है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों, न्याय पंचायतों और सीमांत क्षेत्रों तक प्रतियोगिताओं का विस्तार कर बच्चों को व्यापक अवसर दिए गए हैं। सरकार द्वारा 11 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे विजेता खिलाड़ियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे पारदर्शिता और प्रोत्साहन दोनों सुनिश्चित हो रहे हैं।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने प्रतियोगिता की बहुस्तरीय संरचना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह अभियान न्याय पंचायत स्तर से शुरू होकर विधायक, सांसद और अंततः मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी तक पहुंचता है। उन्होंने बताया कि 8 से 14 वर्ष और 19 वर्ष तक के बच्चों को लगातार अवसर मिल रहे हैं। हाल ही में देहरादून जिले ने फाइनल चरण में पांच लाख रुपये की धनराशि और ट्रॉफी जीतकर अन्य जिलों के लिए प्रेरणा का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

राज्य सरकार नई खेल नीति के तहत प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ स्पोर्ट्स लीगेसी प्लान पर भी काम कर रही है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण तेजी से हो रहा है, वहीं स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना का कार्य भी प्रगति पर है। सरकार का उद्देश्य खेल उद्योग को बढ़ावा देना और उत्तराखंड को खेलों के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाना है।

आगामी वर्षों—2027, 2030 और 2036—में प्रस्तावित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार बच्चों को अभी से तैयार करने की रणनीति पर काम कर रही है। इस व्यापक अभियान ने न केवल खेल के प्रति जागरूकता बढ़ाई है, बल्कि समाज के हर वर्ग को इससे जोड़ने का कार्य भी किया है। उत्तराखंड अब देवभूमि के साथ-साथ खेलभूमि के रूप में भी अपनी नई पहचान गढ़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।