देहरादून
चारधाम यात्रा को उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है। यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि राज्य के हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है। होटल व्यवसायी, ढाबा संचालक, टैक्सी चालक, गाइड, तीर्थ पुरोहित, व्यापारी और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोग—सभी की सालभर की रोज़ी-रोटी इस यात्रा से जुड़ी रहती है। राजस्व की दृष्टि से भी यह यात्रा राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए 2025 की यात्रा समाप्त होते ही अगली यात्रा की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। सरकार नोडल एजेंसी के रूप में समन्वय का कार्य करती है, लेकिन यात्रा को सफल बनाने में वास्तविक भूमिका उन सभी स्टेकहोल्डर्स की होती है जो प्रत्यक्ष रूप से तीर्थयात्रियों की सेवा में लगे रहते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा हमारे राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और यह पूरी तरह से उत्तराखंड की लाइफलाइन है। इस यात्रा से प्रदेश का पूरा व्यवसाय संचालित होता है और हजारों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। होटल व्यवसायी, ढाबा संचालक, टैक्सी चालक, गाइड, व्यापारी, तीर्थ पुरोहित और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोग—सभी की सालभर की आय का बड़ा हिस्सा इसी यात्रा पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा कि राजस्व की दृष्टि से भी चारधाम यात्रा राज्य के लिए बेहद अहम है। इसलिए सरकार का प्रयास है कि यात्रा हर दृष्टि से बेहतर, सुरक्षित और सुव्यवस्थित हो। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 की यात्रा समाप्त होते ही अगली यात्रा की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं।