कांग्रेस के नेता आजकल राजनीति कम और कॉमेडी ज्यादा कर रहे हैं- मुख्यमंत्री धामी

देहरादून

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में प्रेस वार्ता में कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर समाज को बांटने, झूठे दावे करने और देश सेवा करने वालों का अपमान करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी को आगे भी हार का एहसास होता रहेगा। नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए भी उनमें अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं देती। कांग्रेस के नेता आजकल राजनीति कम और कॉमेडी ज्यादा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भावी पीढ़ी भी जान रही है कि कांग्रेस के शासनकाल की पहचान विकास से ज्यादा घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ी रही। वक्त और सरकारें बदल गईं, लेकिन कांग्रेस के पुराने कारनामे आज भी लोगों की यादों में ताजा हैं।

उन्होंने कहा कि अपनी हार का ठीकरा कभी EVM तो कभी संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ना कांग्रेस की आदत बन गई है। जनता का विश्वास खो चुकी कांग्रेस को अब हार के लिए कोई नया बहाना तलाशना होगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कांग्रेस ने हल्द्वानी की घटना को जातीय रंग देकर समाज को बांटने की कोशिश की। हर मुद्दे में जाति तलाशना उनकी राजनीति का हिस्सा बनता जा रहा है, जबकि उत्तराखंड की पहचान हमेशा सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की रही है।

राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, राहुल गांधी जी, उत्तराखंड पर बोलने से पहले तथ्य जान लीजिए। आप कहते हैं एक भी नकल माफिया जेल नहीं गया, जबकि 100 से अधिक आरोपियों पर कार्रवाई हुई और 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली। झूठे दावों से उत्तराखंड की सच्चाई नहीं बदलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा NSA अजीत डोभाल पर लगाए गए आरोप हों या कांग्रेस नेता की दिवंगत CDS जनरल बिपिन रावत पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी, देश की सेवा करने वालों को लेकर कांग्रेस नेताओं की भाषा बार-बार सवाल खड़े करती है। राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, देशसेवा का सम्मान अपनी जगह।

प्रेस वार्ता के अंत में मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलन को याद करते हुए कहा कि खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा गोलीकांड को उत्तराखंड कभी नहीं भूल सकता। उस समय उत्तर प्रदेश में सपा और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। इतिहास के इन काले अध्यायों को याद रखना जरूरी है, क्योंकि उत्तराखंड के निर्माण के पीछे हमारे आंदोलनकारियों का संघर्ष और उनका बलिदान जुड़ा हुआ है।