देहरादून
उत्तराखंड में बढ़ते सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए धामी सरकार अब ‘एक्शन मोड’ में है। संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि विभाग अब दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ‘साइंटिफिक एनालिसिस’ का सहारा ले रहा है।
अकेले देहरादून में 80 बड़े हादसों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि चूक कहाँ हुई—रोड इंजीनियरिंग में, पुलिस की ढिलाई में या फिर चालक की लापरवाही में। विभाग अब केवल चालान तक सीमित नहीं है; ANPR कैमरे, रडार गन और ई-चालान जैसी आधुनिक तकनीकों से नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 24 घंटे पैनी नजर रखी जा रही है।
पहाड़ों में सफर को सुरक्षित बनाने के लिए सड़कों पर क्रैश बैरियर और डेलिनेटर लगाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। मेहरा ने जोर दिया कि सरकारी सख्ती के साथ-साथ ‘जन-जागरूकता’ ही असली चाबी है। इसके लिए स्कूलों में बच्चों को रोड सेफ्टी की शिक्षा और युवाओं को ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की ट्रेनिंग दी जा रही है।