इतिहास के पन्नों में कुछ तारीखें सिर्फ तारीखें नहीं होतीं वे ऐसे घाव होती हैं, जिनकी टीस सदियों बाद भी महसूस होती है। 14 अगस्त देश के इतिहास का वो काला दिन, जब आजादी की भोर से ठीक पहले भारत का विभाजन हुआ यह सिर्फ जमीन और सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों के घर, परिवार और भावनाओं का बंटवारा था विभाजन के दौरान लाखों लोगों को अपना घर-बार और जन्मभूमि छोड़कर अनजान रास्तों पर पलायन करना पड़ा हिंसा और त्रासदी में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई और असंख्य परिवार हमेशा के लिए बिछड़ गए इसी दर्द और विभाजन की त्रासदी को याद करने के लिए 14 अगस्त को देशभर में ‘विभाजन विभीषिका दिवस’ मनाया जा रहा है उत्तराखंड में भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की पहल पर सभी जनपदों में विशेष प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है इन प्रदर्शनियों के जरिए विभाजन के दौरान लोगों ने जो पीड़ा झेली, उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है वहीं, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि 14 अगस्त हमारे इतिहास का वह काला दिन है, जब करोड़ों लोगों को अपनी मातृभूमि से बेघर होना पड़ा। परिवार उजड़े और लाखों लोगों ने विभाजन की त्रासदी झेली उन्होंने कहा कि इन तस्वीरों और इतिहास के माध्यम से युवा पीढ़ी को यह बताना जरूरी है कि देश की आजादी हमें कितनी बड़ी कीमत चुकाने के बाद मिली उन्होंने युवा पीढ़ी से अपने इतिहास को जानने और देश की अखंडता की रक्षा का संकल्प लेने की अपील की। साथ ही विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की।