देहरादून
हरिद्वार कुंभ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग तेज, CM धामी बोले- संतों-साधुओं के सुझाव पर ही फैसला
हरिद्वार में 2027 के अर्धकुंभ मेला से पहले तीर्थ पुरोहितों, श्री गंगा सभा, और अन्य धार्मिक संगठनों की ओर से कुंभ क्षेत्र के 105 गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं (खासकर मुस्लिमों) के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग जोर पकड़ रही है। संगठन पुराने कानूनों जैसे 1916 और 1935 के हरिद्वार नगरपालिका नियमों का हवाला देते हुए कह रहे हैं कि हर की पौड़ी और आसपास के क्षेत्र पहले से ही ऐसे प्रतिबंधों के तहत हैं, इन्हें पूरे कुंभ क्षेत्र तक बढ़ाया जाना चाहिए।
कई साधु-संतों और नेताओं ने इसे मक्का-मदीना के नियमों से तुलना करते हुए कहा है कि जिस तरह वहां गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है, वैसे ही हरिद्वार जैसे पवित्र सनातन तीर्थ में भी हिंदू आस्था और पवित्रता की रक्षा के लिए कड़े कदम जरूरी हैं। मांग में सिर्फ घाटों तक सीमित नहीं, बल्कि रात में ठहरने, संपत्ति खरीद और अन्य गतिविधियों पर भी रोक की बात उठ रही है, ताकि कुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और धार्मिक गरिमा बनी रहे। इस पूरे विवाद पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट और संतुलित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार मां गंगा का विशेष स्थान है, जहां पुराणों के अनुसार स्नान से पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं। कुंभ मेला, चार धाम यात्रा और अन्य तीर्थ स्थलों के लिए अलग-अलग एक्ट और नियम हैं, जिनका सरकार गहन अध्ययन कर रही है।
यहां के प्रमुख हितधारक (स्टेकहोल्डर्स) तीर्थ पुरोहित, पूज्य साधु-संत, गंगा सभा और अन्य धार्मिक संस्थाएं हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार इन सभी के सुझावों का सम्मान करती है और उन्हीं के आधार पर निर्णय लेती है। जब सभी संगठन और संत विस्तार से चर्चा करेंगे, तो सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ेगी जो उनकी ओर से सुझाया जाएगा, ताकि हरिद्वार की आध्यात्मिक महत्ता और पवित्रता हमेशा बनी रहे।