आज उत्तराखंड मीडिया में सरकार के एक फैसले की काफी वाहवाही हो रही है जिस फैसले में सरकार ने पुलिस के जवानों को 2001 बैच के सभी पुलिस वालों को ₹200000 एकमुश्त देने के लिए आदेश जारी करा दिया लेकिन सरकार को नहीं मालूम था यह आदेश को जारी करने के बाद सरकार की वाहवाही होनी चाहिए थी उसी फैसले के खिलाफ पुलिस और पुलिस के परिजन लगातार सरकार को लानत भेजने का काम कर रहे हैं यहां तक कि सूत्रों के मुताबिक मिली जानकारी के मुताबिक कई पुलिसवाले ₹200000 की एकमुश्त मिलने वाली रकम को दान स्वरूप पुलिस मुख्यालय में और उत्तराखंड सरकार को देने को तैयार हैं इतना ही नहीं पुलिस के परिजन इस ₹200000 की रकम को महज झुनझुना करार दे रहे हैं नाम न छापने की शर्त पर पुलिस के एक जवान ने बकायदा अपने कप्तान को पत्र लिखकर ₹200000 की रकम को दान स्वरूप पुलिस मुख्यालय को देने की बात स्वीकार की है इतना ही नहीं पुलिस के परिजन सरकार के इस फैसले की घोर निंदा कर रहे हैं इतना ही नहीं कुछ पुलिस के जवान स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने की बात भी कह रहे हैं हालांकि सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए पुलिस के परिजनों को शांत करने के लिए ₹200000 की एकमुश्त रकम देने के लिए आदेश तो जारी किया है लेकिन पुलिस के जवानों को सरकार के इस फैसले में एक षड्यंत्र की बू नजर आ रही है और इसका असर 14 फरवरी को होने वाले मतदान में पुलिस के परिजन सरकार को सबक सिखा सकते हैं हालांकि प्रदेश हित को देखते हुए सरकार को अपने इंटेलिजेंस के आधार पर प्राप्त सूचनाओं को इकट्ठा करते हुए होने वाली किसी अनहोनी से पहले ही समाधान निकालते हुए बीच का रास्ता अख्तियार करना चाहिए था ताकि पुलिस परिजन भी शांत हो जाएं और उनके ग्रेड पे का मसला ₹200000 तक सीमित न रहकर जो उनकी जायज मांग है उसको पूरा करने तक परवान चढ़ जाए। हालांकि अब अगली सरकार जो चुनकर आएगी वह ग्रेड पर के मसले को किस रूप में देख पाती है यह तो आने वाला वक्त बताएगा।
ब्यूरो रिपोर्ट जन सदन