देहरादून
पिटकुल के प्रबंध निदेशक के अतिरिक्त कार्यभार के लिए वरिष्टता के आधार पर पीसी ध्यानी को मिल सकती है जिम्मेदारी !
पिटकुल के प्रबन्ध निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार वरिष्ठता के आधार पर तीनों निगमों में कार्यरत सबसे वरिष्ठ निदेशक को देने की परम्परा रही है । वर्ष 2009 में श्री एस. मोहन राम द्वारा प्रबन्ध निदेशक पिटकुल के पद से त्यागपत्र देने के बाद वरिष्ठता के आधार पर उत्तराखंड पावर कार्पोरेशन लिमिटेड में कार्यरत श्री त्रिलोचन पांडा, निदेशक वित्त, उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लि० को सबसे बरिष्ठ निदेशक होने के कारण पिटकुल के प्रबंध निदेशक का प्रभार दिया गया था । इसी प्रकार वर्ष 2020 में श्री संदीप सिंघल , की नियुक्ति प्रबन्ध निदेशक यूजेवीएन लि के पद पर होने से पिटकुल के प्रबंध निदेशक का कार्यभार श्री अतुलअग्रवाल- निदेशक परिचालन उत्तराखंड पावर कार्पोरेशन लिमिटेड को तीनों ऊर्जा निगमों में सबसे वरिष्ठ होने के कारण प्रबंध निदेशक पिटकुल का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया। वर्तमान में पिटकुल के प्रबन्ध निदेशक श्री दीपक रावत IAS का स्थानान्तरण कुमाऊं कमिश्नर के पद पर होने से पिटकुल के प्रबंध निदेशक का पद रिक्त हो गया है जिस कारण पिटकुल के प्रबंध निदेशक का चार्ज किसी वरिष्ठ निदेशक को दिया जाना है ।वर्तमान में तीनों ऊर्जा निगमों में श्री पीसी ध्यानी-निदेशक मानव संसाधन, पिटकुल सबसे वरिष्ठ हैं। वह निदेशक मानव संसाधन के पद पर 26.5.2016 से 6.5.2020 तक उपाकालि में तथा 3.2.2020 से पिटकुल में ( 3.2.2020 से 6.5.2020 तक पिटकुल के साथ-साथ उपाकालि का अतिरिक्त कार्यभार भी रहा है) वर्तमान तक निरन्तर निदेशक मानव संसाधन के पद पर कार्यरत हैं । उनके बाद श्री संजय मित्तल निदेशक परिचालन पिटकुल 7.4.2017 हैं। श्री मित्तल का निदेशक के पद पर पॉंच वर्ष का कार्यकाल 7.4.2022 को पूर्ण हो रहा है । ऐसे में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ऊर्जा प्रदेश के क्षेत्र में राज्य को आगे बढ़ाने के लिए ऊर्जा निगम के तीनों महकमों में स्थाई अधिकारियों की नियुक्ति करनी बेहद जरूरी होगी। हालांकि श्रेष्ठता के आधार पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और ऊर्जा मंत्री डॉ हरक सिंह रावत की पहली पसंद पिटकुल के निदेशक मानव संसाधन के पद पर तैनात पीसी ध्यानी बने हुए हैं हालांकि श्रेष्ठता के आधार पर पीसी ध्यानी को प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त चार्ज मिल सकता है ! पीसी ध्यानी उत्तराखंड की भौगोलिक विषमताओं को बखूबी समझते हैं और प्रबंधन के कार्य में भी निपुण माने जाते हैं हालांकि अपने कड़क निर्णय के लिए पीसी ध्यानी जाने जाते हैं लेकिन पीसी ध्यानी को कब तक पिटबुल की कमान सौंपी जाती है इस पर फैसला सरकार को लेना है लेकिन परंपरा और बरियता के आधार पर पीसी ध्यानी पहले पायदान पर बने हुए हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट देहरादून