मोबाइल की लत और बढ़ती असहिष्णुता बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती, समाज को आत्ममंथन की जरूरत।

देहरादून

 

 

मोबाइल की लत और बढ़ती असहिष्णुता बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती, समाज को आत्ममंथन की जरूरत।

हाल ही में गाजियाबाद की एक अत्यंत दुखद घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। तीन नाबालिग बच्चियों द्वारा एक साथ आत्मघाती कदम उठाने की खबर ने बच्चों के मानसिक संतुलन, पारिवारिक संवाद और डिजिटल निर्भरता जैसे मुद्दों को केंद्र में ला दिया है। बताया जा रहा है कि पिता द्वारा मोबाइल फोन छीने जाने के बाद बच्चियों ने यह कदम उठाया, जिसने समाज को गहरे सोच में डाल दिया है।

इस घटना को लेकर उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह घटना बच्चों में बढ़ती असहिष्णुता और मोबाइल जैसी डिजिटल चीजों की लत को उजागर करती है। डॉ. खन्ना ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को प्यार और सुविधाएं देने के साथ-साथ सही-गलत की समझ और ‘ना’ सुनने की आदत भी सिखाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे बड़ों के व्यवहार से सीखते हैं, इसलिए परिवारों में स्वस्थ संवाद, सीमित डिजिटल उपयोग और आपसी समय बेहद जरूरी है, ताकि बच्चे सुरक्षित और खुशहाल बचपन जी सकें।