उत्तराखंड में राशन कार्ड की ई-केवाईसी को लेकर अब भी कई पात्र लाभार्थियों के राशन से वंचित होने की आशंका जताई जा रही है।

देहरादून

 

 

उत्तराखंड में राशन कार्ड की ई-केवाईसी को लेकर अब भी कई पात्र लाभार्थियों के राशन से वंचित होने की आशंका जताई जा रही है…….भारत सरकार के निर्देशों के तहत प्रदेश भर में पिछले वर्ष राशन कार्ड को पूरी तरह डिजिटल करने के उद्देश्य से ई-केवाईसी अभियान चलाया गया था…..सरकार की ओर से इस प्रक्रिया की समय-सीमा दो बार बढ़ाई गई, जिसकी अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तय की गई थी…….खाद्य मंत्री रेखा आर्य ने स्पष्ट किया कि ई-केवाईसी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि राशन कार्ड का लाभ वास्तविक और पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचे….. विशेष रूप से अंत्योदय और पीएचएच श्रेणी के कार्डधारकों के लिए यह प्रक्रिया आवश्यक थी, ताकि बायोमेट्रिक अथवा आंखों की रेटिना के माध्यम से कार्ड पूरी तरह डिजिटल रूप में पंजीकृत हो सकें…….उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा लगातार जन-जागरूकता अभियान चलाया गया और पात्र लोगों की मांग पर ई-केवाईसी की समय-सीमा दो बार बढ़ाई गई……अंतिम तिथि तक विभाग को लगभग 80 प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त हुई है….. मंत्री ने कहा कि जो लोग ई-केवाईसी से छूटे हैं, उनके मामलों की जांच की जाएगी कि वे किन कारणों से प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए…….रेखा आर्य ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लाभार्थियों को गंभीर बीमारी, दिव्यांगता या बायोमेट्रिक व रेटिना सत्यापन में तकनीकी समस्या थी, उन्हें पहले ही छूट दी गई है और ऐसे किसी भी व्यक्ति को राशन से वंचित नहीं किया जाएगा…..यदि इसके बावजूद कोई पात्र व्यक्ति छूट जाता है, तो राज्य सरकार भारत सरकार से इस विषय में अनुरोध करेगी।