देहरादून
उत्तराखंड में कृषि औद्यानिकी से जुड़े आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर अक्सर प्रश्न उठते आए हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और सटीकता के उद्देश्य से पारंपरिक खसरा और लेखपाल प्रणाली के स्थान पर राज्य में आधुनिक डिजिटल क्राप सर्वे प्रणाली लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। मोबाइल एप आधारित इस प्रणाली में जियो फेंसिंग, सेटेलाइट इमेजरी और जीपीएस जैसी तकनीकी का उपयोग कर प्रत्येक खेत से बोई गई फसल की सटीक जानकारी मिल सकेगी। उत्पादन को लेकर भी तस्वीर साफ होगी।
केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के क्रम में राज्य में डिजिटल क्राप सर्वे के दृष्टिगत पायलट आधार पर 63 गांवों में लेखपालों के माध्यम से सर्वे कराया एप आधारित सर्वेक्षण प्रक्रिया से विभिन्न फसलों के उत्पादन की तस्वीर भी आएगी सामने
सेटेलाइट इमेजरी का उपयोग किया जाता है।
सर्वे सुनिश्चित करने को कसरत की जा रही है। इसके तहत सभी 95 ब्लाक के 15,906 गांवों में खेतों में हर खेत में बोई फसल की मिलेगी सटीक जानकारी
यह होंगे लाभ
कृषि प्रणाली योजना, उत्पादन अनुमान और सरकारी योजनाओं का लाभपहुंचाने का बदलेगा तरीका। पारदर्शिता और धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम, पात्र किसानों तक पहुंचेगा योजनाओं का लाभ।
प्राकृतिक आपदा में फसल क्षति का सटीक आकलन सेटेलाइट और जियो फेंसिंग आंकड़ों के आधार पर होगा। इस प्रणाली को अपनाने पर किसानों को फसल बीमा की मुआवजा राशि पाने के लिए नहीं करना पड़ेगा इंतजार ।
बोई गई फसलों का सर्वे होना है। यह खरीफ और रबी सीजन में अलग-अलग होगा।